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3 एक्सपर्ट्स से जानिए जीएसटी की

बड़ी उलझनों के आसान जवाब,3 एक्सपर्ट्स से जानिए जीएसटी की

1. ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन करने में काफी दिक्कत आ रही है। हरियाणा और यूपी के लिए जीएसटी का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने पर वेरिफिकेशन तो हो जाता है, लेकिन एआरएन नंबर नहीं मिल रहा है। क्या करें? – रजनी शर्मा, कनॉट प्लेस
यह जीएसटीएन से जुड़ी तकनीकी दिक्कत है और इसके लिए आपको जीएसटीएन हेल्प डेस्क की मदद लेनी चाहिए। हो सकता है कि किसी समय विशेष में ऐसा हुआ हो और अब दिक्कत दूर हो गई हो।

2. एक ओर सरकार जहां स्वच्छ भारत की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर सैंपू, हैंड वॉश, साबुन पर 28 फीसदी का टैक्स लगा दिया है। ऐसे में स्वच्छ भारत का सपना कैसे पूरा होगा? – दीपक रैना, गाजियाबाद

किसी भी कमोडिटी पर रेट जीएसटी काउंसिल तय करती है और वही इसमें छूट भी दे सकती है। काउंसिल में केंद्र और राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व है। कमोडिटी विशेष पर रेट को लेकर सरकार के अपने तर्क हैं और वही इस बारे में कटौती की पहल भी कर सकती है।

3. वॉशिंग मशीन सही करने के लिए एलजी कंपनी से आए इंजिनियर ने सर्विस चार्ज के नाम पर 500 रुपये तो ले लिए, लेकिन मशीन सही नहीं किया। पूछे जाने पर इंजिनियर ने बताया कि वॉशिंग मशीन का एक पार्ट खराब है जो जीएसटी के कारण बाजारों में नहीं मिल रहा है। इसलिए वह वॉशिंग मशीन को सही नहीं कर सकता है। जीएसटी के नाम पर गुमराह करने वाले ऐसे इंजिनियर और संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रावधान है क्या? – सूबेदार सिंह ठाकुर, पांडव नगर

आपका सवाल जीएसटी से कम, कंपनी के अनुचित व्यापार व्यवहार से ज्यादा ताल्लुक रखता है। जीएसटी के चलते पार्ट का बाजार में नहीं मिलना तर्कसंगत नहीं है। पहले तो आपको कंपनी के कस्टमर केयर पर दोबारा कंप्लेन करनी चाहिए। वैसे भी ज्यादातर कंपनियां विजिटिंग चार्ज पर कुछ हफ्ते का वैलिडिटी पीरियड देती हैं। इस दौरान अगर इंजीनियर को रोज भी आपके यहां आना पड़े तो विजिटिंग चार्ज नहीं लगेगा। अगर आपका प्रॉडक्ट वॉरंटी पीरियड में है और कंपनी कोई पार्ट लगाने से आनाकानी कर रही है तो आप कन्ज्यूमर फोरम में भी शिकायत कर सकते हैं। यह भी जांच लें कि जो रकम आपने विजिटिंग सर्विस (500 रु) पर जीएसटी के तौर पर दी है, वह बिल में दिखाई गई है या नहीं। बिल में कंपनी या मकैनिक का टिन नंबर भी चेक करें।

4. 2015-16 में किस्तों पर फ्लैट खरीदा था। तय रकम के अनुसार पहली और दूसरी किस्त का भुगतान कर दिया। लेकिन अब जीएसटी के साथ किस्त मांग रहे हैं जबकि फ्लैट की डील जीएसटी लागू होने से पहले हुई थी। फिर बाद में जीएसटी लगाकर किस्त लेना कितना सही है? – नवीन, पहाड़गंज

यह साफ नहीं है कि आपकी डील बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने से पहले हुई या नहीं। अगर पहले हुई तो ऐसी प्रॉपर्टी अंडरकंस्ट्रक्शन ट्रीट की जाएगी और 30 जून के बाद की बकाया रकम पर वह आपसे जीएसटी चार्ज करने का हकदार है। लेकिन ऐसे मामलों में कुछ प्रावधानों को लेकर भ्रम बना हुआ है। चूंकि आपका बिल्डर जीएसटी से पहले इनपुट पर चुकाए टैक्स का क्रेडिट लेने का हकदार है, ऐसे में उसका दायित्व बनता है कि वह अपने लाभ को ग्राहक के साथ शेयर करे यानी कीमत में छूट दे। लेकिन आम तौर पर ऐसा देखने को नहीं मिल रहा।

5. मेरी छोले भठूरे की दुकान है। इसलिए कंपोजिशन में जीएसटी नबंर लिया है। लेकिन मेरा कमर्शल स्पेस भी है जिससे रेंट आता है। ऐसे में मुझे फिर से जीएसटी नंबर के लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा या कंपोजिशन जीएसटी से ही काम चल जाएगा? सुभाष, रोहिणी, सेक्टर-13

चूंकि आपकी रेंट से भी इनकम हो रही है और कंपोजिशन में सर्विसेज शामिल नहीं हैं, ऐसे में आपको रेग्युलर डीलर के तौर पर रजिस्ट्रेशन लेना पड़ेगा।

6. रिटायर्ड टीचर विभिन्न राज्यों में होनेवाली परीक्षाओं की कॉपी चेक करते हैं। पेपर चेक करने के बदले में शिक्षकों को साल में एक बार 20 से 25 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन दूसरा राज्य होने के चलते जीएसटी नंबर लेना है और हर महीने रिटर्न भी फाइल करना होगा। ऐसे मामलों को तो टैक्स फ्री कर देना चाहिए। – विनोद चतुर्वेदी, सीए, लोनी रोड

आपको रिटर्न नहीं भरना होगा। कॉपी चेकिंग भी कुछ शर्तों के साथ जीएसटी के दायरे से बाहर है। पहली बात तो यह कि आपकी सालाना आमदनी 20-25 हजार हो रही है, जो जीएसटी रजिस्ट्रेशन के छूट की सीमा 20 लाख से कम है। आपकी लाइबिलिटी इसलिए बन सकती थी कि आपकी सर्विस सप्लाइ इंट्रस्टेट हो रही है, लेकिन जीएसटी कानून में हायर सेकेंडरी तक कॉपी चेकिंग या परीक्षा कराने जैसी गतिविधियां टैक्स फ्री हैं। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि हर तरह की कॉपी चेकिंग टैक्स फ्री नहीं हो सकती। आप किसी उच्च या प्राइवेट शिक्षण संस्थान या कोचिंग सेंटर के लिए कमर्शल सर्विस दे रहे हैं तो वहां इंट्रस्टेट सप्लाइ पर रजिस्ट्रेशन लेना पड़ सकता है।

7. एक सरकारी कंपनी में मेरी कैब चलती है। जीएसटी लागू होने से पहले कंपनी के साथ एक अग्रीमेंट साइन हुआ था जिसपर जीएसटी का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन अब कंपनी जीएसटी लगाने की बात कह रही है। यह कितना उचित है? – राम प्रसाद, मदनगीर

आपकी सर्विस नई टैक्स रिजीम में भी जारी है तो 30 जून बाद इस पर जीएसटी चार्ज होगा न कि पुराने टैक्स।

8. अगस्त महीने में रिटर्न फाइल करते समय पर्चेजिंग बिल और इनपुट टैक्स शामिल करना भूल गया था। उसे अगले महीने के रिटर्न फाइल में शामिल कर सकते हैं या नहीं? अगर शामिल किया जा सकता है तो उसका तरीका क्या है? – राजेश, तिलक नगर

अगर अगस्त महीने की जीएसटीआर-3बी में कुछ त्रुटि हो गई है तो आप जीएसटीआर-1 भरते समय भी इसे ठीक कर सकते हैं। चाहें तो लेट पेमेंट के साथ दोबारा 3-बी फाइल कर दें। अगस्त की 3-बी को सितंबर की 3बी के साथ क्लब नहीं कर सकते। लेकिन संशोधन के विकल्प आपके पास कई हैं।

9. घर बनाने के लिए ऑथराइज्ड डीलर से 20 लाख रुपये का मटीरियल लिया था। घर बनकर भी तैयार हो गया, लेकिन अभी तक डीलर ने बिल नहीं दिया है। हर बार जीएसटी का बहाना कर गुमराह कर रहा है। ऐसे डीलर के खिलाफ किससे और कहां शिकायत की जा सकती है? दलबीर सिंह, महिपालपुर

बिल लेना आपका कानूनी हक है और इतनी बड़ी रकम पर बिल न जारी करना तो अपराध और टैक्स चोरी के दायरे में आता है। आपको बिल सप्लाइ के समय ही ले लेना चाहिए था। आप इसकी शिकायत स्थानीय जीएसटी अधिकारियों से कर सकते हैं।

10. फरीदाबाद में कपड़े की दुकान चलाता हूं, एक साल की सेल 15 से 16 लाख है। थोक में कपड़े की खरीदारी दिल्ली से करता हूं। ऐसे में जीएसटी नंबर लेना जरूरी है या नहीं क्योंकि दिल्ली से माल खरीदने पर होलसेल विक्रेता जीएसटी नबंर की मांग करते हैं? – राज कुमार, फरीदाबाद

आपका टर्नओवर तो जीएसटी छूट की सीमा में आता है, लेकिन आपकी खरीद-बिक्री इंटरस्टेट लगती है। ऐसे में आपको रजिस्ट्रेशन लेना होगा।

11. जीएसटी लागू होते ही व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है। रिटर्न फाइलिंग और अलग-अलग टैक्स स्लैब से ज्यादा दिक्कतें हैं। जनता की परेशानियां कम करने के लिए क्या किया जा रहा है? – चंद्र प्रकाश शर्मा, रानी बाग

रिटर्न फाइलिंग में आपकी पोर्टल संबंधी तकनीकी शिकायतें वाजिब हैं और इसमें सुधार किया जा रहा है। जहां तक स्लैब तय करने की बात है, यह जीएसटी काउंसिल करती है और आगे भी इस पर उसी का निर्णय मान्य होगा। जैसे-जैसे करदाताओं की परेशानियां सामने आएंगी, हम समझते हैं कि सरकार उन्हें दूर करने के उपाय भी करेगी।

12. किरायेदार से हर महीने 12,000 रुपये का इनकम है। यह जीएसटी के दायरे में आएगा या नहीं? अगर जीएसटी के दायरे में आता है तो पूरी जानकारी दें। – राज यादव, मंगोलपुरी

चूंकि किरायेदार से सालाना इनकम 20 लाख से कम है और अगर आपकी दूसरी इनकम जोड़कर भी यह सीमा पार नहीं होती तो रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। बशर्ते की किराये वाली प्रॉपर्टी आपके राज्य से बाहर नहीं होनी चाहिए।

13. जीएसटी में बडे़ व्यापारी जो घपला कर रहे हैं उनकी मॉनिटरिंग की क्या व्यवस्था है? – प्रमोद कुमार, अजीत नगर

जीएसटी में किस तरह के घपले किए जा रहे हैं यह आपने स्पष्ट नहीं किया है। आपका मतलब अगर व्यापारी की टैक्स चोरी से है तो जीएसटी पहले की टैक्स प्रणालियों के मुकाबले टैक्स चोरी रोकने में ज्यादा कारगर है। डेटा मैचिंग और मल्टीपल चेकपॉइंट से इस पर लगाम कसेगी। अगर आपका मतलब इनपुट क्रेडिट का लाभ हजम कर जाने या ग्राहक को इसका फायदा नहीं देने से है तो इसके लिए भी एंटी-प्रॉफिटिरिंग प्रावधान हैं।

14. मैं एक छोटा बिजनेसमैन हूं। किसी व्यापारी ने मुझसे प्रॉड्क्ट के ऑर्डर के लिए अगस्त में अडवांस के तौर पर 15 लाख रुपये दिए। लेकिन अगस्त महीने में 10 लाख का ही माल दे पाया। बाकी 5 लाख रुपये का रिटर्न उस महीने फाइल करना है या अगले महीने कर सकते हैं? – विकास, वसुंधरा

अगर आपको अगस्त में अडवांस के तौर पर 15 लाख रुपये मिल हैं तो उस महीने यह आपकी आय मानी जाएगी और उसके आधार पर आपको उसी महीने टैक्स जमा कराना होगा। बाकी सप्लाइ और बची रकम को आगे के रिटर्न में अजस्ट किया जा सकता है। अगर कोई क्रेडिट या रिफंड बनता है तो वह भी आप क्लेम कर सकते हैं।

15. ऑनलाइन टूर ऐंड ट्रैवल्स कंपनियों को तो जीएसटी में काफी रियायतें हैं, लेकिन ऑफ लाइन एजेंसी को नहीं। ऑन लाइन एजेंसी को होटल बुकिंग पर जीएसटी नहीं लगता है, लेकिन ऑफलाइन की बुकिंग पर जीएसटी लगता है। ऐसे में ऑफ लाइन टूर ऐंड ट्रैवल्स एजेंसियां बंद होने के कगार पर हैं। दोनों पर एक तरह के नियम लागू क्यों नहीं है? – प्रवीण घई, पश्चिम विहार

जीएसटी किसी भी तरह की टैक्सेबल सप्लाइ की वास्तविक ट्रांजैक्शन वैल्यू पर देय होगा। इसमें ऑनलाइन या ऑफलाइन का कोई विशेष अंतर नहीं है। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट की होटल बुकिंग पर टैक्स नहीं लगता यह धारणा सही नहीं है। ई-कॉमर्स की लागत संबंधी कुछ खूबियां जरूर हैं जिससे ऑफलाइन ऑपरेटर्स को चुनौती मिल सकती है। लेकिन यह जीएसटी प्रावधानों में बदलाव से दूर नहीं होगी।

16. केंद्र सरकार ने आनन-फानन में जीएसटी तो लागू कर दिया, लेकिन अभी भी जीएसटी में कई खामियां है, जिसका जवाब न तो सीए के पास है और नहीं सरकार के पास। जीएसटी को पूरी तरह समझाने के लिए सरकार ने क्या पहल की है? – विजय नाथ, चावड़ी बाजार

जीएसटी से आम कारोबारी को वाकिफ कराने के लिए कई प्रयास हुए हैं। सरकार और प्राइवेट सेक्टर दोनों स्तरों पर कैंपेन, वर्कशॉप और ट्रेनिंग होती रही है। फिर भी अगर आपको कुछ जानना है तो आप जीएसटी हेल्पडेस्क, फैसिलिटेशन सेंटर और कई अन्य जगहों पर संपर्क कर सकते हैं। कंप्लायंस के लिए बेहतर है कि विशेषज्ञ की मदद लें।

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